NEWS TODAY- SEPTEMBER 1, MONDAY, 2014.

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राजे सरकार का स्कूलों के लिए नया प्लान

जयपुर। राजस्थान के शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ ने बताया है कि विद्यालयों के समन्वयन के तहत प्रदेश के किसी भी सरकारी विद्यालय को बन्द करने की कोई योजना नहीं है। 

जहां पर्याप्त संख्या में विद्यार्थी उपलब्ध हैं वहां पर शिक्षक भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कराकर शिक्षा के गुणात्मक सुधार पर जोर दिया जाएगा। यह भी शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत निर्घारित मानदण्डों के अनुसार एक ही राजस्व ग्राम में किया जा रहा है। 

सराफ ने रविवार को यहां बताया कि विद्यालयों के समन्वयन के संबंध में आदेश गत 14 अगस्त को जारी किए गए हैं। इसके तहत प्रत्येक राजस्व ग्राम को अलग इकाई मानते हुए उसी ग्राम में स्थित विद्यालयों को समन्वित रूप से संचालन कर शिक्षा की गुणवत्ता की दृष्टि से यह कदम उठाया गया है। 

सराफ ने बताया कि कु छ मामलों में इस संदर्भ में कठिनाइयों अथवा विसंगतियों की तरफ ध्यान आकर्षित किया गया है। ऎसे मामलों में जिला कलक्टर व शिक्षा निदेशकों के माध्यम से आपत्तियां प्राप्त करने की व्यवस्था की गई है। अभी तक प्राप्त सूचना के आधार पर लगभग 3 प्रतिशत मामलों में ही आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। 

उन्होंने बताया कि जिला कलक्टर व संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी से मौके की तथ्यात्मक टिप्पणी 8 सितम्बर तक प्राप्त की जाएगी। इसके पश्चात् प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर राज्य सरकार के स्तर पर समुचित निर्णय लिया जाएगा। 

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विद्यालय को बन्द करने की कोई योजना नहीं है। -
 

टीचर्स डे पर मोदी के संबोधन के लिए बच्‍चों को स्‍कूल बुलाए जाने पर बवाल, स्‍मृति ने दी सफाई

नई दिल्‍ली: 5 सितंबर को टीचर्स डे के मौके पर पीएम नरेंद्र माेदी के भाषण के दौरान सभी स्‍कूलों में बच्‍चों की मौजूदगी सुनिश्‍च‍ित कराने से जुड़े सरकारी आदेश पर विवाद बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से देश के सभी स्‍कूलों को जारी आदेश में कहा गया है कि 5 सितंबर को बच्चे दोपहर 3 बजे से पीएम का भाषण सुन सकें, इसकी व्‍यवस्‍था की जाए। गैर बीजेपी राज्यों में इस आदेश का विरोध शुरू हो गया है। वहीं, पश्‍च‍िम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने इसका पालन करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, मानव संसाधन मंत्री स्‍मृति र्इरानी ने सोमवार को साफ किया कि पीएम का भाषण सुनना ऐच्‍छ‍िक है। ईरानी ने कहा, ”यह बच्‍चों की मर्जी पर निर्भर करता है कि वह भाषण सुनना चाहते हैं कि नहीं। मुझे लगता है कि किसी तरह का मिसकम्‍यूनिकेशन हुआ है। ”
क्‍या है मामला 
सभी स्‍कूलों को सर्कुलर जारी करके कहा गया है कि 5 सितंबर को दोपहर ढाई बजे से 5 बजे के बीच होने वाले इस इवेंट के लिए जरूरी तैयारियां की जाएं। मोदी बच्‍चों को न केवल संबोधित करेंगे, बल्‍क‍ि एक सवाल-जवाब का सेशन भी होगा। इस बातचीत का प्रसारण दूरदर्शन पर किया जाएगा। इसके अलावा, मानव संसाधन मंत्रालय की वेबसाइट पर भी इसकी लाइव स्‍ट्रीमिंग की जाएगी। मोदी दिल्‍ली के स्‍कूली बच्‍चों के साथ आमने-सामने बातचीत करेंगे, जबकि लेह, लद्दाख, पोर्ट ब्‍लेयर, सिलचर और इंफाल जैसे सुदूर के इलाकों तक सैटेलाइट लिंक के जरिए जुड़ेंगे। सभी स्‍कूलों को सोमवार शाम 5 बजे तक यह रिपोर्ट दाखि‍ल करनी थी कि कितने बच्‍चे कार्यक्रम में शामिल होंगे और अधिकारियों ने इसके लिए क्‍या तैयारियां की हैं। कुछ स्‍कूलों ने तो अभ‍िभावकों को संदेश भेजकर कहा है कि वे अपने बच्‍चों की कार्यक्रम में मौजूदगी सुनिश्‍च‍ित करें। वहीं, दिल्‍ली सरकार की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया है कि तैयारियों में किसी तरह की ढील होने पर सख्‍ती बरती जाएगी।
क्‍या है विरोध 
अधिकतर स्‍क‍ूलों के प्रिंसिपल कार्यक्रम की टाइमिंग को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकतर स्‍कूल दोपहर तक बंद हो जाते हैं, ऐसे में दोपहर 3 बजे से कार्यक्रम आयोजित करने का क्‍या औच‍ित्‍य है? वहीं, कुछ टीचर्स का कहना है कि उन्‍हें इस कार्यक्रम की वजह से शाम 5 बजे तक स्‍कूल में रूकना होगा। टीचरों के लिए मनाए जाने वाले इस खास दिन पर क्‍या यह ज्‍यादती नहीं है? वहीं, विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार पर इस पूरी प्रक्र‍िया के जरिए राजनीति करने का आरोप लगा रही हैं। उनका कहना है कि क्‍या बच्‍चों को बुलाकर भाषण सुनाना जरूरी है?
क्‍या कह रही हैं पार्टियां 
कांग्रेस प्रवक्‍ता मनीष तिवारी ने कहा, ‘सरकार अध्‍यापकों, स्‍टूडेंट्स और अभिभावकों सभी के लिए परेशानी पैदा कर रही है। पीएम को अपने भाषण का शेड्यूल बदलना चाहिए।’
पश्‍च‍िम बंगाल के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा, ‘हमें केंद्र सरकार के निर्देश मिले हैं, लेकिन हम इसका पालन नहीं करेगे। हम अपनी योजना के मुताबिक ही कार्यक्रम आयोजित करेंगे।’
शिवसेना के प्रवक्‍ता संजय राउत ने कहा, ‘अगर केंद्र सरकार ने टीचर्स डे के संदर्भ में कुछ फैसला लिया है तो यह सबके लिए है। पीएम के पास ऐसे फैसले लेने का पूरा अधिकार है।’
बीजेपी की सहयोगी पीएमके के नेता रामादौस ने कहा, ‘हम पीएम के बच्‍चों से बातचीत करने के फैसले का स्‍वागत करते हैं, लेकिन हम इसे गुरु उत्‍सव नाम दिए जाने का विरोध करते हैं। यह संस्‍कृत थोपने की कोशिश है, जो कबूल नहीं है। ‘

3,623 Comments

  1. शिक्षामंत्री के बयान की शिक्षक
    संगठनों ने की निंदा, बताया झूठा
    Dainikbhaskar.com |
    Sep 1, 2014, 07:13:00 PM IST
    शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ (फाइल
    फोटो)
    जयपुर। शिक्षक संगठनों ने
    शिक्षामंत्री कालीचरण सराफ के स्कूल
    बंद नहीं करने के बयान
    की निंदा की है। शिक्षकों ने
    कहा कि शिक्षामंत्री का बयान शिक्षकों को भ्रमित
    करने वाला है। यह तथ्यों से परे और सरासर झूठा बयान है।
    राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) के प्रवक्ता प्रकाश
    मिश्रा का कहना है कि 14 अगस्त वाले आदेश में स्पष्ट
    उल्लेख है कि 17129 स्कूलों का अपना अलग से कोई अस्तित्व
    नहीं होगा। अगर ऐसा है कि तो फिर यह स्कूल बंद
    होने के बराबर ही है।
    शिक्षामंत्री को इस प्रकार
    की बयानबाजी करने
    की बजाय शिक्षा में गुणवत्ता सुधार
    की बात करनी चाहिए। साथ
    ही यह बताना चाहिए कि वे शिक्षा विभाग के केलेंडर
    को एक साथ क्यों जारी नहीं कर पा रहे
    हैं।
    सरकार
    की ऐसी क्या मजबूरी है।
    इससे न केवल शिक्षकों बल्कि अभिभावकों और बच्चों में
    भी भ्रम की स्थिति बन
    रही है। गौरतलब है कि शिक्षामंत्री ने
    रविवार को एक भी स्कूल को एकीकरण
    में बंद नहीं करने का बयान दिया था।

  2. Is blog. ke alava sarkaar ki galat nitiyo ke faisalo ke bare m dosto what’s up par b dalo or logo ko batao or is sarkaar ka virodh karo jis se ye baat jaldi se jaldi logo or sarkaar Tak pahuch kar dabav ban sake apne apne shetro m dosto dhanyavaad …

  3. समानीकरण के लिए रोडमैप तैयार
    Monday, September 1, 2014 12:51 pm

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    उदयपुर, 1 सितम्बर। शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 17 हजार प्राथमिक माध्यमिक स्तर के सरकारी स्कूलों में एकीकरण का चरण पूरा करने के बाद अब समानीकरण लागू करने के लिए रोड मैप तैयार करते हुए मापदंड तय कर दिए हैं।  प्रदेश के सभी डिप्टी डायरेक्टर एवं डीईओ से दो दिन में स्कूलों की रिपोर्ट मांगी है। इसमें बताना होगा विद्यालय में कहां शिक्षक कम और कहां ज्यादा हैं। नामांकन की स्थिति, विषयवार शिक्षकों का ब्यौरा देना होगा। एसीएस श्याम अग्रवाल ने एसआईईआरटी में रविवार को राज्य के सभी प्रारंभिक जिला शिक्षा अधिकारी और डिप्टी डायरेक्टर्स की बैठक में ये निर्देश दिए। अग्रवाल ने एकीकरण के बाद मर्ज हुए विद्यालयों को लेकर शिकायतों के बारे में पूछा। कुछ डीईओ ने बताया कि ज्यादातर शिकायतें गांव में हैं, जिसमें प्रमुख रूप से स्कूल दूर होने की समस्या है। एसीएस ने 31 अगस्त तक कलेक्टर के मार्फत शिकायतें मांगी हैं। मीटिंग के बाद डीईओ के संभाग अनुसार समूह बनाए गए। प्रत्येक उमा विद्यालय में समानीकरण के नए मापदंड की बुकलेट दी गई। प्रत्येक समूह को अलग-अलग कमरे में बैठाया। जिसमें नए मापदंडों के बारे में समझाया गया। एसीएस ने नए समानीकरण के लिए दो दिन में रिपोर्ट मांगी है। इसमें डीईओ को अपने विद्यालयों में नामांकन के अनुसार टीचर्स की जरूरत सहित अन्य रिपोर्ट देनी होगी। मीटिंग में बीकानेर शिक्षा निदेशालय निदेशक ओंकारसिंह, सर्वशिक्षा अभियान कमिश्नर हनुमान सिंह भाटी भी मौजूद थे।   शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ ने संभाग के जिला शिक्षा अधिकारियों की बैठक में कहा कि भामाशाह नाम से संचालित स्कूल मर्ज नहीं होंगे। कोई अधिकारी प्रतिनियुक्ति नहीं करेगा। इसकी आड़ में कई ट्रांसफर करा लेते हैं। जरूरत पर डायरेक्टर से अनुमति लेनी होगी। उन्होंने एकीकरण के बारे में अधिकारियों से फीड बैक लिया। मीटिंग के बाद बाहर निकलते समय सैकड़ों शिक्षकों ने मांगों को लेकर मंत्री के सामने ही नारेबाजी शुरू कर दी।
    मंत्री ने उनकी मांगें सुनी। शिक्षक संगठनों ने शिक्षकों की पदोन्नति, 2012 में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थायीकरण की मांग रखी, जिस पर आश्वासन भी दिया।

     

    ये होंगे मापदंड

    प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 5 में नामांकन 150 तक है तो 30 नामांकन पर अध्यापक (ग्रेड थ्री)एक होगा। 150 से 200 तक नामांकन है तो एक हेडमास्टर और एक अध्यापक होंगे। इससे अधिक होने पर अतिरिक्त 40 नामांकन पर एक अध्यापक होगा।
    उप्रा विद्यालय में कक्षा 6 से 8 का नामांकन 120 से कम मेें होने पर तीन टीचर और इससे अधिक होने पर अतिरिक्त 40 नामांकन पर एक टीचर होगा।
    माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 6 से 10 का नामांकन 240 से कम होने पर सेकंड ग्रेड टीचर 6 और इससे अधिक होने पर अतिरिक्त 40 नामांकन पर एक अध्यापक होगा।
    पंचायत समिति में कुल उमा विद्यालयों की संख्या – एक तिहाई विद्यालयों में विज्ञान संकाय खोलने के प्रस्ताव मांगे गए हैं।

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